Short Poem in Hindi | Love Poems | Hindi Shayari


A very Classic and selected collection of Hindi poems for all of you. The collection if best for love , to express feelings to your loved ones.  It is all about poems in hindi , hindi poetry, hindi Shyari .
                                  हमारी आँखों में भी चला जाता है क़तरा कभी कभी…!
हर बार अश्कों की वज़ह महज़ तुम ही नहीं होते…..!
तुम्हारी खुशियों के ठिकाने बहुत होंगे,,,
मगर, हमारी बेचैनियों की वजह बस तुम हो…!!!

 

मेरे होठों के करीब हैं होंठ तेरे ..
ऐसे मे शराफत का सवाल कहां
करने दे जी भर के गुस्ताखियां के अब इजाजत का सवाल कहां..|

 

बहुत ख़ास थे कभी नज़रों में किसी के हम भी मगर नज़रों के तकाज़े
बदलने में देर कहाँ लगती है…

 

आँखों मे आँसुओं की लकीर बन गई जैसी चाहिए थी वैसी तकदीर बन गई हमने
तो सिर्फ रेत में उँगलियाँ घुमाई थीं गौर से देखा तो आप की तस्वीर बन गई..

 

मैं तेरे इश्क़ की छाँव में…
जल-जलकर ! काला न पड़ जाऊं कहीं
!
तू मुझे हुस्न की धूप का एक टुकड़ा दे..!

 

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हिम्मत इतनी तो नहीं मुझमे के तुझे दुनिया से छीन लूँ ,
लेकिन मेरे
दिल से कोई तुझे निकाले,
इतना हक तो मैंने खुद को भी नहीं दिया..

 

खुद को कुछ इस तरह तबाह किया
इश्क़ किया क्या ख़ूबसूरत गुनाह किया

जब मुहब्बत में न थे तब खुश थे हम
दिल का सौदा किया बेवजह किया..

 

नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई
पाँव जब तलक उठे कि ज़िन्दगी
फिसल गई
पात-पात झर गए कि शाख़-शाख़ जल गई
चाह तो निकल सकी न पर उमर निकल गई…

 

बहुत राब्ता न सही हम में,
बहुत मुलाकाते भी नहीं है
मगर ये जो राब्ता
हमारे बीच है
मोहब्बत की निजामत है….

 

एक सुकून की तलाश मे जाने कितनी बेचैनियां पाल ली
और लोग कहते है
हम बडे हो गए हमने जिंदगी संभाल ली…

 

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इन ग़म की गलियों में कब तक ये दर्द हमें तड़पाएगा
इन रस्तों पे
चलते-चलते हमदर्द कोई मिल जाएगा..

 

एकपल का एहसास बनकर आते हो तुम
दुसरे ही पल ख्वाब बनकर उड़ जाते
हो तुम
जानते हो की लगता है डर तन्हाइयों से फिरभी
बारबार तनहा छोड़ जाते हो तुम…

 

तेरी गली का सफर आज भी याद है मुझे,
मैं कोई वैज्ञानिक नहीं था पर
मेरी खोज लाजवाब थी तुम !!

 

कभी उनकी याद आती है,
कभी उनके ख़्वाब आते हैं …
हमें सताने के
सलीके तो उन्हें बेहिसाब आते हैं !!

 

ना जाने कब खर्च हो गए पता ही नही चला ।।
वो लम्हे , जो बचा कर रखे
थे हमने जीने के लिए ।।

 

कौन कहता है मुसाफिर जख्मी नही होते
रास्ते गवाह हैं कम्बख्त गवाही
नही देते।

 

ऐ उम्र कुछ कहा मैंनें,
पर शायद तूने सुना नहीं…
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं

 

क्या साथ लाए क्या छोड़ आए रस्ते में हम
क्या छोड़ आए मंज़िल पे
जा के ही याद आता है…

 

सिद्धांत, सपनों पर भरोसा नही करते
इसलिये सत्य के मस्तक पर कभी
झूठ नही पलते•••○…

 

न वो तुम रहे न वो दिल रहा न वो चाहतें

वही हम रहे
वही गम रहा वही दूरियाँ वही हसरतें |

 

शब्दों का शोर तो कोई भी सुन सकता है,
खामोशियों की आहट सुनो तो
कोई बात है..

 

मंज़िलों से गुमराह भी कर देते हैं
कुछ लोग हर किसी से रास्ता पूछना
अच्छा नहीं होता…

तुम आ गए हो,
तो फिर चाँदनी सी बातें हों,
ज़मी पे चाँद…..
कहाँ
रोज़-रोज़ उतरता है.

 

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आदमी मुसाफ़िर है आता है जाता है
आते-जाते रस्ते में यादें छोड़
जाता है…

 

बे तलब दर्द की दोलत से नवाजो मुझको
दिल की तौहीन है मरहूनी दुआ
हो जाना !

 

ज़िंदगी-भर तो हुई गुफ़्तगू गैरों से मगर,
आज तक हमसे न हमारी मुलाक़ात
हुई ….

 

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अँखियों को रहने दे अँखियों के आस पास
दूर से दिल की बुझती रहे प्यास…

 

 

जो मिला अपने ही मतलब से मिला….
काश मतलब निकालना हमें भी आता..

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